Wednesday, 04 November 202604 Nov 2026
बड़ी खबरें
BPCL पाइपलाइन के खिलाफ किसानों का विरोध, जंत्री का 4 गुना मुआवजा मांगापाटन को मिला ₹65 करोड़ का नया कैंसर अस्पताल, ट्रस्ट करेगा संचालन; आयुष्मान कार्डधारकों को मुफ्त पीईटी-सीटीगुजरात जीएसटी राजस्व अक्टूबर 2026 में 16% बढ़ा – लोक सामनापीएम मोदी गुजरात दौरा: ₹14,000 करोड़ की परियोजनाएँ, पीएम-किसान किस्तसाबरमती–महेसाणा के बीच दो नई दैनिक मेमू ट्रेनों को मंजूरी, बेचराजी होकर चलेंगीदिवाली से पहले AMC ने अहमदाबाद में 40,000 किलो संदिग्ध घटिया मावा जब्त कियागुजरात मौसम: 29-30 अक्टूबर को बारिश, IMD का पूर्वानुमानगुजरात सूखा 2026: 4 जिले सूखाग्रस्त घोषित, जानें राहत पैकेज
Englishગુજરાતીहिन्दी
बाज़ार
सेंसेक्स77,204.46▲ 286.61 (0.37%)निफ्टी 5023,898.65▲ 87.80 (0.37%)डॉलर/रुपया₹94.81▲ 0.08 (0.09%)सोना 24K₹1,42,850/10 ग्राम▲ 3,160 (2.26%)सोना 22K₹1,30,950/10 ग्राम▲ 2,900 (2.26%)चांदी₹2,00,000/किलो
अपडेट 04 Nov, 01:46 PM सेंसेक्स, निफ्टी और डॉलर का भाव बाज़ार खुला रहने पर हर कुछ मिनट में अपडेट होता है। सोना-चांदी के भाव आज के अहमदाबाद के भाव हैं (3% GST और मेकिंग चार्ज के बिना)।
विज्ञापनविज्ञापन

BPCL पाइपलाइन के खिलाफ किसानों का विरोध, जंत्री का 4 गुना मुआवजा मांगा

सुरेंद्रनगर के मूली तालुका के धर्मेंद्रगढ़, उमरडा और चोरवीरा के किसानों ने करीब 100 बीघा में BPCL पाइपलाइन का काम रुकवाया। सिर्फ 12 रुपये प्रति वर्ग मीटर मुआवजे का आरोप लगाकर उन्होंने जंत्री का चार गुना और फसल नुकसान की भरपाई मांगी।

9 मिनट में पढ़ें
BPCL पाइपलाइन के खिलाफ किसानों का विरोध, जंत्री का 4 गुना मुआवजा मांगा

सुरेंद्रनगर, 4 नवंबर 2026: गुजरात के सुरेंद्रनगर जिले के मूली तालुका के तीन गांवों के किसानों ने अपने खेतों से गुजर रही भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (BPCL) की पाइपलाइन का काम रुकवा दिया है। किसानों का आरोप है कि मुआवजा अपर्याप्त है, वादे के मुताबिक जमीन का मिट्टी-भराई का काम नहीं हुआ और फसल नुकसान का कोई मुआवजा नहीं दिया गया। धर्मेंद्रगढ़, उमरडा और चोरवीरा गांव के किसानों का कहना है कि उनकी मांगें पूरी होने तक लगभग 100 बीघा जमीन पर पाइपलाइन का काम नहीं होने दिया जाएगा। उनकी मुख्य मांग जंत्री के चार गुना मुआवजे की है।

संक्षेप में: सुरेंद्रनगर में क्या हो रहा है?

  • कहां: धर्मेंद्रगढ़, उमरडा और चोरवीरा गांव, मूली तालुका, सुरेंद्रनगर जिला, गुजरात
  • कौन: BPCL पाइपलाइन के रूट में आने वाली खेती की जमीन के किसान
  • प्रभावित जमीन: तीनों गांवों की लगभग 100 बीघा
  • मौजूदा मुआवजा (किसानों के दावे के अनुसार): लगभग 12 रुपये प्रति वर्ग मीटर
  • मुख्य मांग: जंत्री का चार गुना मुआवजा और फसल नुकसान की भरपाई
  • अन्य शिकायतें: वादे के अनुसार मिट्टी का काम नहीं हुआ; पाइपलाइन वाली जमीन पर पांच साल तक फसल न ले पाने की समस्या
  • मौजूदा स्थिति: काम ठप; समाधान न होने तक काम न होने देने की चेतावनी

सुरेंद्रनगर के किसान BPCL पाइपलाइन का विरोध क्यों कर रहे हैं?

पाइपलाइन का रूट खेतों से गुजरने के साथ किसानों में तीन मुख्य मुद्दों पर नाराजगी बढ़ी है।

1. "बेहद कम" मुआवजा

किसानों के अनुसार BPCL पाइपलाइन रूट में इस्तेमाल हो रही जमीन के लिए सिर्फ लगभग 12 रुपये प्रति वर्ग मीटर दे रही है। किसानों का कहना है कि यह रकम उपजाऊ खेती की जमीन की असली कीमत और खेत खोदे जाने से होने वाले आय के नुकसान से मेल नहीं खाती। इसलिए वे गुजरात सरकार द्वारा तय जंत्री के चार गुना मुआवजे की मांग कर रहे हैं।

2. मिट्टी के काम का वादा पूरा नहीं हुआ

पाइपलाइन बिछाते समय खेत में खाई खोदी जाती है, पाइप डाला जाता है और फिर मिट्टी भर दी जाती है। किसानों का कहना है कि कंपनी ने काम के बाद जमीन को समतल करके पहले जैसी स्थिति में लाने का भरोसा दिया था। लेकिन वादे के मुताबिक मिट्टी का काम नहीं हुआ। इससे जमीन ऊबड़-खाबड़ हो गई, नीचे की मिट्टी ऊपर आ गई और ऊपरी उपजाऊ परत को नुकसान पहुंचा है।

3. फसल नुकसान और सालों तक कम पैदावार

किसानों का कहना है कि जहां से पाइपलाइन गुजरती है, वहां लगभग पांच साल तक ठीक से फसल नहीं हो पाती। छोटे और सीमांत किसानों के लिए यह बड़ा झटका है। वे निर्माण के दौरान नष्ट हुई खड़ी फसल और उसके बाद के वर्षों में घटी पैदावार के लिए अलग मुआवजे की मांग कर रहे हैं।

बार-बार ज्ञापन, फिर भी समाधान नहीं

किसानों का कहना है कि विरोध उनका पहला कदम नहीं था। जंत्री के चार गुना मुआवजे की मांग को लेकर उन्होंने मामलतदार और डिप्टी कलेक्टर से बार-बार गुहार लगाई। लेकिन कोई समाधान नहीं निकला, इसलिए उन्होंने अपनी जमीन पर काम रोकने का फैसला किया।

किसानों का रुख साफ है कि जब तक मुआवजा, मिट्टी का काम और फसल नुकसान का मामला नहीं सुलझता, वे अपने खेतों में पाइपलाइन का काम आगे नहीं बढ़ने देंगे।

यह रिपोर्ट लिखे जाने तक किसानों की मांगों पर BPCL या जिला प्रशासन की ओर से कोई सार्वजनिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई थी।

जंत्री क्या है और किसान "जंत्री का 4 गुना" मुआवजा क्यों मांग रहे हैं?

जंत्री गुजरात सरकार द्वारा हर क्षेत्र के लिए तय की जाने वाली जमीन की आधिकारिक दर है। संपत्ति की रजिस्ट्री के समय स्टांप ड्यूटी और पंजीकरण शुल्क की गणना इसी से होती है। जंत्री दर अक्सर जमीन के वास्तविक बाजार भाव से काफी कम होती है, खासकर सड़क, शहर या औद्योगिक क्षेत्र के पास की खेती की जमीन में।

"जंत्री का चार गुना" मांगने का मतलब है आधिकारिक दर को आधार बनाकर उसे कई गुना करना, ताकि मुआवजा किसान के वास्तविक आर्थिक नुकसान के करीब पहुंचे। बिजली लाइनों पर गुजरात सरकार के हालिया फैसले (नीचे विवरण) ने ऐसी मांगों को और बल दिया है।

भारत में तेल-गैस पाइपलाइन के लिए जमीन का मुआवजा कैसे तय होता है?

पेट्रोलियम और गैस पाइपलाइन के लिए कंपनियां आमतौर पर जमीन खरीदती नहीं हैं। पेट्रोलियम एवं खनिज पाइपलाइन (भूमि में उपयोग के अधिकार का अर्जन) अधिनियम, 1962 के तहत सरकार रूट पर जमीन की एक पट्टी में केवल उपयोग का अधिकार (RoU) लेती है। जमीन का मालिकाना हक किसान के पास ही रहता है।

  • किसान जमीन का मालिक बना रहता है और पाइपलाइन दबने के बाद आमतौर पर खेती जारी रख सकता है।
  • RoU पट्टी में कुछ पाबंदियां लागू होती हैं, जैसे पाइपलाइन के ऊपर निर्माण, कुआं या टांका खोदना या गहरी जड़ वाले पेड़ लगाना आमतौर पर मना होता है।
  • उपयोग के अधिकार के लिए और निर्माण के दौरान फसल, पेड़ों और मिट्टी को हुए नुकसान के लिए मुआवजा दिया जाता है।

मालिकाना हक किसान के पास रहने के कारण RoU का प्रति वर्ग मीटर मुआवजा जमीन खरीद की कीमत से काफी कम होता है। देशभर में पाइपलाइन विवादों की जड़ यही अंतर है। किसानों का तर्क है कि स्थायी पाबंदियों से जमीन की कीमत और भविष्य के इस्तेमाल के विकल्प घटते हैं, इसलिए मुआवजा न्यायसंगत होना चाहिए।

पूरे गुजरात में एक पैटर्न: बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के मुआवजे पर किसानों की आवाज

मूली का विरोध कोई अकेली घटना नहीं है। पिछले कुछ महीनों में सौराष्ट्र भर के किसानों ने अपनी जमीन से गुजरने वाली परियोजनाओं के मुआवजे को लेकर आवाज उठाई है।

बिजली लाइन विरोध और सरकार की मुआवजा बढ़ोतरी

हाई-वोल्टेज बिजली लाइनों और टावरों से प्रभावित जमीन को लेकर किसानों में लंबे समय से असंतोष था। 9 जून 2026 से आंदोलन का नया दौर शुरू हुआ, जिसमें मोरबी जिले का जेतपर गांव प्रमुख केंद्र बना। इसके बाद गुजरात सरकार ने मुआवजे में बड़ी बढ़ोतरी की घोषणा की। अब प्रभावित किसानों को जमीन के मौजूदा बाजार भाव का दोगुना मुआवजा मिलेगा। सरकार ने किस्तों वाली व्यवस्था भी खत्म कर दी है, यानी पूरा मुआवजा परियोजना का काम शुरू होने से पहले एकमुश्त दिया जाएगा।

अब दूसरे विवादों में भी इस फैसले का हवाला दिया जा रहा है। पाइपलाइन से प्रभावित कई किसान पूछ रहे हैं कि उनके लिए भी बाजार भाव आधारित और अग्रिम भुगतान वाला ऐसा ही फॉर्मूला क्यों न लागू हो।

सुरेंद्रनगर में पहले भी टकराव

सुरेंद्रनगर जिले में ऐसी परियोजनाओं को लेकर पहले भी टकराव हो चुका है। इस साल कोंढ गांव में पावरग्रिड कंपनी की हाई-टेंशन लाइन के खिलाफ लगभग 200 किसानों ने विरोध किया था। तब 500 से ज्यादा पुलिसकर्मियों की तैनाती के बीच कंपनी ने काम जारी रखा था। वहां के किसानों ने भी पर्याप्त मुआवजे और उचित कॉरिडोर की मांग की थी।

बढ़ता राजनीतिक दबाव

मुआवजे का मुद्दा अब राजनीति में भी पहुंच गया है। 22 अक्टूबर को कांग्रेस के गुजरात प्रभारी रणदीप सुरजेवाला ने बिजली लाइनों से प्रभावित किसानों के लिए ज्यादा मुआवजे, सौराष्ट्र में सूखा घोषित करने और फसल ऋण माफी की मांग की थी।

सुरेंद्रनगर के किसानों के लिए मुश्किल साल

पाइपलाइन विवाद ऐसे समय सामने आया है जब जिले के किसान पहले से ही संकट में हैं। इस साल सुरेंद्रनगर में सामान्य से लगभग 25 प्रतिशत कम बारिश हुई है। इससे मूंगफली और कपास के उत्पादन में भारी गिरावट आई है। स्थानीय किसानों ने जिले को तुरंत सूखाग्रस्त घोषित करने और कृषि ऋण व कर्ज माफी के साथ राहत की मांग की है।

जिस किसान की इस सीजन की ज्यादातर फसल पहले ही खराब हो चुकी हो, उसके लिए मामूली मुआवजे पर और जमीन पाइपलाइन में खोना खास तौर पर दर्दनाक है। इससे समझ आता है कि मूली तालुका का विरोध इतना मजबूत क्यों है।

किसानों की मांगें

  1. पाइपलाइन के लिए इस्तेमाल जमीन का जंत्री का चार गुना मुआवजा।
  2. निर्माण के दौरान हुए फसल नुकसान का मुआवजा।
  3. पाइपलाइन वाली जमीन में सालों तक घटी पैदावार का मुआवजा (किसानों के अनुसार पांच साल तक)।
  4. कंपनी के वादे के मुताबिक सही तरीके से मिट्टी का काम (समतलीकरण और भराई)।
  5. जमीन पर आगे काम होने से पहले प्रशासन की ओर से स्पष्ट समाधान।

आगे क्या?

  • जिला प्रशासन के जरिए बातचीत: कलेक्टर कार्यालय किसानों और कंपनी अधिकारियों को साथ बैठाकर मुआवजे में बदलाव या नुकसान का निपटारा करा सकता है।
  • नुकसान का दोबारा आकलन: अधिकारी फसल और मिट्टी के नुकसान का नया पंचनामा कर सकते हैं।
  • नीति स्तर पर बदलाव: रूट के दूसरे गांवों में विरोध फैला तो मामला राज्य या केंद्र सरकार तक पहुंच सकता है, जैसा बिजली लाइनों के मामले में हुआ।
  • कानूनी रास्ता: किसान लागू कानून के तहत सक्षम प्राधिकारी या अदालत में मुआवजे को चुनौती दे सकते हैं।
  • पुलिस सुरक्षा में काम: पहले के कुछ मामलों में कंपनियों ने भारी पुलिस बल की मौजूदगी में काम शुरू किया है, जिससे तनाव बढ़ता है।

लोक सामना न्यूज़ मूली तालुका के घटनाक्रम पर नजर रखेगा और BPCL या जिला प्रशासन की प्रतिक्रिया आने पर यह रिपोर्ट अपडेट करेगा।

मुख्य बातें

  • मूली तालुका के धर्मेंद्रगढ़, उमरडा और चोरवीरा के किसानों ने लगभग 100 बीघा जमीन पर BPCL पाइपलाइन का काम रुकवाया है।
  • किसानों का कहना है कि उन्हें सिर्फ लगभग 12 रुपये प्रति वर्ग मीटर मिल रहे हैं; वे जंत्री का चार गुना मांग रहे हैं।
  • वादे के अनुसार मिट्टी का काम नहीं हुआ और पाइपलाइन वाली जमीन पर पांच साल तक ठीक फसल न होने की शिकायत है।
  • मामलतदार और डिप्टी कलेक्टर से बार-बार गुहार के बावजूद समाधान नहीं निकला।
  • यह विरोध बिजली लाइनों के लिए बाजार भाव का दोगुना और अग्रिम मुआवजा देने के 2026 के सरकारी फैसले और जिले में लगभग 25 प्रतिशत कम बारिश के बीच हो रहा है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)

सुरेंद्रनगर के किसान BPCL का विरोध क्यों कर रहे हैं?

मूली तालुका के किसानों का कहना है कि खेतों से पाइपलाइन बिछाने के लिए BPCL का मुआवजा बहुत कम है, वादे के अनुसार मिट्टी का काम नहीं हुआ और फसल नुकसान का मुआवजा नहीं मिला।

BPCL पाइपलाइन विरोध में कौन से गांव शामिल हैं?

सुरेंद्रनगर जिले के मूली तालुका के धर्मेंद्रगढ़, उमरडा और चोरवीरा गांव के किसान इस विरोध में शामिल हैं।

किसानों को अभी कितना मुआवजा मिल रहा है?

विरोध कर रहे किसानों के अनुसार उन्हें पाइपलाइन रूट की जमीन के लिए लगभग 12 रुपये प्रति वर्ग मीटर दिए जा रहे हैं।

किसान कितने मुआवजे की मांग कर रहे हैं?

किसान जंत्री के चार गुना मुआवजे के साथ फसल नुकसान और घटी पैदावार के मुआवजे की मांग कर रहे हैं।

गुजरात में जंत्री क्या है?

जंत्री गुजरात सरकार द्वारा तय जमीन की आधिकारिक दर है। स्टांप ड्यूटी और रजिस्ट्री के लिए इसका इस्तेमाल होता है और यह अक्सर बाजार भाव से कम होती है।

क्या पाइपलाइन बिछने से किसान जमीन का मालिकाना हक खो देता है?

आमतौर पर नहीं। 1962 के पाइपलाइन कानून के तहत सिर्फ उपयोग का अधिकार लिया जाता है। मालिकाना हक किसान के पास रहता है, लेकिन पाइपलाइन के ऊपर निर्माण या गहरी जड़ वाले पेड़ लगाने जैसी पाबंदियां लागू होती हैं।

क्या गुजरात सरकार ने हाल में मुआवजा बढ़ाया है?

हां, बिजली लाइनों के लिए। 2026 में सरकार ने घोषणा की कि प्रभावित किसानों को जमीन के बाजार भाव का दोगुना मुआवजा, काम शुरू होने से पहले एकमुश्त मिलेगा। यह फैसला बिजली लाइनों और टावरों के लिए है, तेल पाइपलाइन के लिए नहीं।

टैग: #surendranagar farmers protest #bpcl pipeline protest

शेयर करेंWhatsAppFacebookXTelegram