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पाटन को मिला ₹65 करोड़ का नया कैंसर अस्पताल, ट्रस्ट करेगा संचालन; आयुष्मान कार्डधारकों को मुफ्त पीईटी-सीटी

मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने 1 नवंबर 2026 को ₹65 करोड़ के पी.बी. पाटन जनता कैंसर अस्पताल का लोकार्पण किया। अब उत्तर गुजरात में पीईटी-सीटी और रेडियोथेरेपी उपलब्ध है।

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पाटन को मिला ₹65 करोड़ का नया कैंसर अस्पताल, ट्रस्ट करेगा संचालन; आयुष्मान कार्डधारकों को मुफ्त पीईटी-सीटी

पाटन, 2 नवंबर 2026: पाटन को एक चैरिटेबल ट्रस्ट द्वारा संचालित नया कैंसर अस्पताल मिला है। गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने रविवार, 1 नवंबर को पी.बी. पाटन जनता कैंसर अस्पताल का लोकार्पण किया। इस पाटन कैंसर अस्पताल के निर्माण पर लगभग ₹65 करोड़ खर्च हुए हैं।

जीवन ज्योत चैरिटेबल ट्रस्ट इस नए अस्पताल का संचालन करता है। इससे उत्तर गुजरात में पहली बार इतने बड़े स्तर पर आधुनिक कैंसर जांच और रेडियोथेरेपी उपलब्ध हुई है। अब कई मरीज़ों को इलाज के लिए अहमदाबाद नहीं जाना पड़ेगा।

संक्षिप्त उत्तर: पोपटलाल भीखचंद (पी.बी.) पाटन जनता कैंसर अस्पताल 1 नवंबर 2026 को पाटन में शुरू हुआ। इसमें 50 बेड, पांच ऑपरेशन थिएटर, रेडियोथेरेपी के लिए लीनियर एक्सेलरेटर और पीईटी-सीटी स्कैनर है। आयुष्मान भारत कार्डधारकों के लिए पीईटी-सीटी स्कैन मुफ्त है।

मुख्य बातें एक नज़र में

  • मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने 1 नवंबर 2026 को अस्पताल का लोकार्पण किया।
  • पाटन कैंसर अस्पताल लगभग ₹65 करोड़ की लागत से बना है।
  • जीवन ज्योत चैरिटेबल ट्रस्ट अस्पताल का संचालन करता है।
  • अस्पताल में 50 बेड और पांच ऑपरेशन थिएटर हैं।
  • लगभग ₹9 करोड़ का पीईटी-सीटी स्कैनर उत्तर गुजरात में अपनी तरह का पहला है।
  • लगभग ₹22 करोड़ का लीनियर एक्सेलरेटर (लिनैक) रेडियोथेरेपी देगा।
  • आयुष्मान कार्डधारकों के लिए पीईटी-सीटी मुफ्त; अन्य मरीज़ों को लगभग ₹12,000 देने होंगे।

पाटन कैंसर अस्पताल: मुख्य तथ्य और आंकड़े

नए अस्पताल का पूरा नाम पोपटलाल भीखचंद पाटन जनता कैंसर अस्पताल है। यह ट्रस्ट के मौजूदा पाटन जनता अस्पताल नेटवर्क का हिस्सा है। ट्रस्ट ने क्षेत्र के दानदाताओं के सहयोग से इसका निर्माण किया है।

विवरणजानकारी
अस्पताल का नामपी.बी. (पोपटलाल भीखचंद) पाटन जनता कैंसर अस्पताल
संचालकजीवन ज्योत चैरिटेबल ट्रस्ट
स्थानपाटन शहर, उत्तर गुजरात
लोकार्पणमुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल
लोकार्पण की तारीख1 नवंबर 2026
कुल लागतलगभग ₹65 करोड़
बेड50
ऑपरेशन थिएटर5
मुख्य उपकरणपीईटी-सीटी स्कैनर (लगभग ₹9 करोड़), लीनियर एक्सेलरेटर (लगभग ₹22 करोड़)
पीईटी-सीटी शुल्कआयुष्मान कार्डधारकों के लिए मुफ्त; अन्य के लिए लगभग ₹12,000

पीईटी-सीटी स्कैनर और लिनैक मिलकर परियोजना की लागत का लगभग आधा हिस्सा हैं। ये दोनों मशीनें आधुनिक कैंसर इलाज की रीढ़ हैं।

उत्तर गुजरात के लिए नया पाटन कैंसर अस्पताल क्यों अहम है

अब तक उत्तर गुजरात में पूर्ण कैंसर केंद्र की कमी थी। पाटन, मेहसाणा, बनासकांठा और आसपास के इलाकों के मरीज़ अक्सर अहमदाबाद जाते थे। पाटन शहर अहमदाबाद से लगभग 125 किमी दूर है।

कैंसर का इलाज शायद ही एक बार में पूरा होता है। उदाहरण के लिए, रेडियोथेरेपी अक्सर कई हफ्तों तक रोज़ चलती है। इसलिए लंबी यात्रा से खाने, रहने और कमाई के नुकसान का भारी खर्च बढ़ता है। पहले से कमज़ोर मरीज़ भी थक जाते हैं।

नया पाटन कैंसर अस्पताल यह स्थिति बदलता है। अब मरीज़ घर के पास ही जांच, सर्जरी और रेडिएशन ले सकते हैं। साथ ही, परिवार पास रहकर अपना काम और खेती जारी रख सकते हैं।

मुख्यमंत्री ने भी कार्यक्रम में यही बात कही। उन्होंने कहा कि क्षेत्र में लंबे समय से विशेष कैंसर इलाज की कमी थी। उन्होंने जोड़ा कि यह अस्पताल मरीज़ों को उत्तर गुजरात से बाहर इलाज के लिए जाने की ज़रूरत कम करेगा।

उत्तर गुजरात में पहली बार पीईटी-सीटी स्कैन

सबसे बड़ी खासियत पीईटी-सीटी स्कैनर है। ट्रस्ट के अनुसार, उत्तर गुजरात में यह अपनी तरह की पहली सुविधा है। इस मशीन की कीमत लगभग ₹9 करोड़ है।

पीईटी-सीटी स्कैन क्या है?

पीईटी-सीटी स्कैन दो जांचों को एक साथ जोड़ता है। पीईटी स्कैन दिखाता है कि कोशिकाएं ऊर्जा कैसे इस्तेमाल करती हैं, जबकि सीटी स्कैन शरीर की बनावट को विस्तार से दिखाता है। दोनों मिलकर डॉक्टरों को कैंसर पहचानने, उसके फैलाव को देखने और इलाज के असर को जांचने में मदद करते हैं।

डॉक्टर फेफड़ों के कैंसर, लिम्फोमा और सिर-गर्दन के कैंसर समेत कई कैंसरों की स्टेजिंग में पीईटी-सीटी का उपयोग करते हैं। इसके अलावा, इससे रेडियोथेरेपी की ज़्यादा सटीक योजना बनती है।

पाटन में पीईटी-सीटी स्कैन का खर्च कितना है?

आयुष्मान भारत कार्ड वाले मरीज़ों के लिए यह स्कैन मुफ्त है। अन्य मरीज़ों को इस जांच के लिए लगभग ₹12,000 देने होंगे। बड़े शहरों के निजी केंद्रों में पीईटी-सीटी अक्सर ज़्यादा महंगा पड़ता है। इसलिए पाटन की यह सुविधा स्थानीय परिवारों के लिए यह अहम जांच काफ़ी सस्ती बनाती है।

₹22 करोड़ के लीनियर एक्सेलरेटर से रेडियोथेरेपी

अस्पताल ने लीनियर एक्सेलरेटर यानी लिनैक भी लगाया है। इस मशीन की कीमत लगभग ₹22 करोड़ है। यह आधुनिक रेडियोथेरेपी का मुख्य उपकरण है।

लिनैक उच्च ऊर्जा वाली एक्स-रे किरणों से कैंसर कोशिकाओं को नष्ट करता है। साथ ही, यह ट्यूमर के आसपास के स्वस्थ ऊतकों को कम नुकसान पहुंचाता है। कई कैंसर मरीज़ों को किसी न किसी चरण में रेडियोथेरेपी की ज़रूरत पड़ती है, अकेले या सर्जरी और कीमोथेरेपी के साथ।

पहले उत्तर गुजरात के मरीज़ों को हर रेडिएशन सत्र के लिए सफ़र करना पड़ता था। अब वे पूरा कोर्स पाटन में ले सकते हैं। इससे समय और पैसा बचेगा और ज़्यादा मरीज़ अपना इलाज पूरा कर सकेंगे।

अस्पताल का संचालन कौन करता है: जीवन ज्योत चैरिटेबल ट्रस्ट

जीवन ज्योत चैरिटेबल ट्रस्ट पाटन जनता अस्पताल समूह का संचालन करता है। डॉ. प्रमोदभाई पटेल इसके मैनेजिंग ट्रस्टी हैं। उन्होंने लोकार्पण के मौके पर ट्रस्ट की उपलब्धियां साझा कीं।

सेवाअब तक लाभार्थी
ओपीडी परामर्श15 लाख से अधिक
भर्ती मरीज़ों का इलाज1.5 लाख से अधिक
सीटी स्कैन1.5 लाख से अधिक
सर्जरी1 लाख से अधिक
एमआरआई स्कैन50,000 से अधिक
एंजियोग्राफी15,000 से अधिक
एंजियोप्लास्टी2,000 से अधिक

ट्रस्ट का अस्पताल पहले से डायलिसिस, आईसीयू, कार्डियक कैथ लैब और न्यूरोसर्जरी की सुविधा देता है। अब कैंसर विंग इसमें ऑन्कोलॉजी भी जोड़ रहा है।

भविष्य की योजना: ट्रांसप्लांट, रोबोटिक सर्जरी और कार्डियक सर्जरी

ट्रस्ट यहीं रुकने वाला नहीं है। आने वाले वर्षों में वह और सुपर-स्पेशियलिटी सेवाएं जोड़ना चाहता है। इनमें शामिल हैं:

  • बोन मैरो ट्रांसप्लांट: ल्यूकेमिया और लिम्फोमा जैसे रक्त कैंसर के इलाज के लिए।
  • किडनी ट्रांसप्लांट: गुर्दे की अंतिम चरण की बीमारी वाले मरीज़ों के लिए।
  • रोबोटिक सर्जरी: ज़्यादा सटीक और कम चीर-फाड़ वाले ऑपरेशन के लिए।
  • कार्डियक सर्जरी: ओपन-हार्ट और बाईपास ऑपरेशन।

ट्रस्ट के अनुसार, ये सेवाएं अभी उत्तर गुजरात में उपलब्ध नहीं हैं। हालांकि, इन्हें शुरू करने के लिए दानदाताओं के निरंतर सहयोग की ज़रूरत होगी।

जनभागीदारी से बने स्वास्थ्य मॉडल का उदाहरण

पाटन कैंसर अस्पताल के निर्माण में दानदाताओं की बड़ी भूमिका रही। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने परियोजना में योगदान देने वाले दानदाताओं का सम्मान किया। स्थानीय रिपोर्टों ने इसे स्वास्थ्य क्षेत्र में जनभागीदारी का उदाहरण बताया।

गुजरात में ट्रस्ट द्वारा चलाए जाने वाले अस्पतालों की पुरानी परंपरा है। ऐसे अस्पताल अक्सर छोटे शहरों में कमी पूरी करते हैं, जहां बड़ी निजी अस्पताल शृंखलाएं कम निवेश करती हैं। साथ ही, इनका शुल्क आमतौर पर कॉरपोरेट अस्पतालों से कम होता है।

लोकार्पण में कई जनप्रतिनिधि मौजूद रहे। इनमें पाटन के विधायक डॉ. किरीट पटेल, सिद्धपुर के विधायक और मंत्री बलवंतसिंह राजपूत तथा राधनपुर के विधायक शामिल थे। कई स्थानीय नेता, दानदाता और नागरिक भी उपस्थित रहे।

लोकार्पण पर मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने क्या कहा

मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम में निवारक स्वास्थ्य पर ज़ोर दिया। उन्होंने चेताया कि डायबिटीज़, हाई ब्लड प्रेशर और मानसिक तनाव जैसी जीवनशैली की बीमारियां बढ़ रही हैं। उन्होंने तंबाकू के बढ़ते सेवन पर भी चिंता जताई।

उन्होंने लोगों से संतुलित जीवनशैली अपनाने, नियमित योग करने और स्वस्थ भोजन लेने की अपील की। इसके अलावा, उन्होंने याद दिलाया कि बुज़ुर्ग सादा और अनुशासित जीवन जीने की सलाह देते थे, और वह सलाह आज भी काम की है।

मुख्यमंत्री ने "नशा मुक्त भारत" के विज़न की भी बात की। उन्होंने 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य को नागरिकों के स्वास्थ्य से जोड़ा।

अंत में, उन्होंने "कैच द रेन" जल संरक्षण अभियान और "एक पेड़ मां के नाम" वृक्षारोपण अभियान में जनभागीदारी की अपील की। उन्होंने स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण पर भी ज़ोर दिया।

मरीज़ पाटन कैंसर अस्पताल का लाभ कैसे लें

उत्तर गुजरात के मरीज़ और परिवार इन बातों का ध्यान रखें:

  • आयुष्मान कार्ड साथ रखें: आयुष्मान भारत कार्डधारकों के लिए पीईटी-सीटी स्कैन मुफ्त है।
  • पुरानी रिपोर्ट लाएं: पहले की बायोप्सी, स्कैन और ब्लड टेस्ट रिपोर्ट से डॉक्टर जल्दी इलाज तय कर पाते हैं।
  • रेडियोथेरेपी का शेड्यूल पूछें: घर के पास इलाज से रोज़ के सत्र पूरे करना आसान होता है।
  • पात्रता पहले जांचें: अस्पताल के हेल्प डेस्क से पूछें कि आपकी योजना में कौन-से इलाज शामिल हैं।

अपॉइंटमेंट, समय और मौजूदा सेवाओं के लिए मरीज़ सीधे अस्पताल से संपर्क करें। नए उपकरण और स्टाफ आने पर सेवाएं बढ़ सकती हैं।

कैंसर की जल्दी पहचान क्यों ज़रूरी है

कैंसर जल्दी पकड़ में आए तो उसका इलाज कहीं आसान होता है। हालांकि, छोटे शहरों के कई मरीज़ देर से अस्पताल पहुंचते हैं। दूरी, खर्च और डर अक्सर पहली जांच में देरी कराते हैं।

स्थानीय कैंसर अस्पताल इस समस्या को हल करने में मदद करता है। जब आधुनिक जांच पास और सस्ती हो, तो लोग समय पर जांच कराने की ज़्यादा संभावना रखते हैं। इसके अलावा, इलाज के बाद नियमित फॉलो-अप भी आसान हो जाता है।

डॉक्टर लोगों को चेतावनी के संकेतों पर नज़र रखने की सलाह देते हैं। इनमें न जाने वाली गांठ, न भरने वाला घाव, असामान्य रक्तस्राव, अचानक वज़न घटना और लंबे समय तक खांसी शामिल हैं। खासकर तंबाकू का सेवन करने वालों को नियमित जांच करानी चाहिए।

पहले और अब: मरीज़ का सफ़र कैसे बदला

पाटन के पास किसी गांव के एक सामान्य कैंसर मरीज़ के बारे में सोचिए। इस अस्पताल के खुलने से पहले, पीईटी-सीटी स्कैन के लिए अक्सर अहमदाबाद तक लंबी यात्रा करनी पड़ती थी। फिर रेडियोथेरेपी के लिए परिवार को बार-बार वहां लौटना पड़ता था।

हर यात्रा का मतलब था एक दिन का सफ़र, एक रात का ठहराव और कमाई का नुकसान। कई परिवारों को देखभाल के लिए एक और सदस्य को साथ भेजना पड़ता था। पूरे इलाज के दौरान ये खर्च अक्सर इलाज से भी ज़्यादा हो जाते थे।

अब वही मरीज़ पाटन में पीईटी-सीटी स्कैन करा सकता है, और आयुष्मान कार्ड होने पर यह मुफ्त है। वह उसी अस्पताल में रेडियोथेरेपी भी ले सकता है। संक्षेप में, जो सफ़र पहले हफ्तों की यात्रा मांगता था, वह अब घर के पास पूरा हो सकता है।

तंबाकू और कैंसर: मुख्यमंत्री की चेतावनी क्यों अहम है

तंबाकू पर मुख्यमंत्री की चेतावनी सीधे कैंसर से जुड़ी है। भारत में तंबाकू का सेवन मुंह, गले और फेफड़ों के कैंसर के प्रमुख कारणों में से एक है। गुटखा, खैनी, बीड़ी और सिगरेट, सभी में यह खतरा है।

डॉक्टरों के अनुसार किसी भी उम्र में तंबाकू छोड़ने से खतरा घटता है। इसके अलावा, मुंह के कैंसर के शुरुआती संकेत, जैसे सफ़ेद या लाल धब्बे और न भरने वाले छाले, आसानी से दिखते हैं। इसलिए नियमित मुंह की जांच जान बचा सकती है, खासकर लंबे समय से तंबाकू खाने वालों में।

कैंसर अस्पताल बीमारी का इलाज करता है, लेकिन रोकथाम नए मामलों की संख्या घटाती है। इसीलिए मुख्यमंत्री ने लोकार्पण के साथ स्वस्थ जीवन और नशा मुक्त समाज का संदेश भी दिया।

ट्रस्ट अस्पताल इलाज को सस्ता कैसे रखते हैं

ट्रस्ट द्वारा चलाए जाने वाले अस्पताल कॉरपोरेट अस्पतालों से अलग तरीके से काम करते हैं। वे आमतौर पर बचत को शेयरधारकों को मुनाफ़े के रूप में देने के बजाय नए उपकरणों और सेवाओं में लगाते हैं। साथ ही, दान से अक्सर इमारत और मशीनों की लागत का एक हिस्सा पूरा हो जाता है।

इसी वजह से ये अस्पताल अपना शुल्क कम रख पाते हैं। कई अस्पताल आयुष्मान भारत जैसी सरकारी योजनाओं से भी जुड़ते हैं, जिससे पात्र मरीज़ों को कैशलेस इलाज मिलता है। पाटन में मुफ्त पीईटी-सीटी की सुविधा इसी सोच का उदाहरण है।

उत्तर गुजरात जैसे क्षेत्र के लिए यह मॉडल अहम है। यह उस छोटे शहर में आधुनिक इलाज लाता है, जिसे बड़ी निजी अस्पताल शृंखलाएं अक्सर नज़रअंदाज़ कर देती हैं।

मुख्य शब्दों को समझें

  • पीईटी-सीटी: एक संयुक्त स्कैन जो कोशिकाओं की गतिविधि और शरीर की बनावट दोनों दिखाता है। यह कैंसर पहचानने और उसकी स्टेज तय करने में मदद करता है।
  • लिनैक (लीनियर एक्सेलरेटर): एक मशीन जो कैंसर कोशिकाओं को नष्ट करने के लिए उच्च ऊर्जा वाला रेडिएशन देती है।
  • रेडियोथेरेपी: रेडिएशन से होने वाला कैंसर इलाज, जो अक्सर कई हफ्तों तक रोज़ के सत्रों में दिया जाता है।
  • आयुष्मान भारत (पीएम-जेएवाई): सरकारी स्वास्थ्य बीमा योजना, जो सूचीबद्ध अस्पतालों में कैशलेस इलाज देती है।
  • ट्रस्ट अस्पताल: चैरिटेबल ट्रस्ट द्वारा आमतौर पर गैर-लाभकारी आधार पर चलाया जाने वाला अस्पताल।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

पाटन में कौन-सा नया कैंसर अस्पताल शुरू हुआ है?

पी.बी. (पोपटलाल भीखचंद) पाटन जनता कैंसर अस्पताल 1 नवंबर 2026 को पाटन, गुजरात में शुरू हुआ।

नए पाटन कैंसर अस्पताल का संचालन कौन करता है?

जीवन ज्योत चैरिटेबल ट्रस्ट अस्पताल का संचालन करता है। डॉ. प्रमोदभाई पटेल ट्रस्ट के मैनेजिंग ट्रस्टी हैं।

पाटन कैंसर अस्पताल का लोकार्पण किसने किया?

गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने 1 नवंबर 2026 को अस्पताल का लोकार्पण किया।

पाटन कैंसर अस्पताल पर कितना खर्च हुआ?

अस्पताल लगभग ₹65 करोड़ की लागत से बना है।

क्या पाटन कैंसर अस्पताल में पीईटी-सीटी स्कैन मुफ्त है?

हां, आयुष्मान भारत कार्डधारकों के लिए पीईटी-सीटी स्कैन मुफ्त है। अन्य मरीज़ों को लगभग ₹12,000 देने होते हैं।

पाटन कैंसर अस्पताल में कितने बेड हैं?

अस्पताल में 50 बेड और पांच ऑपरेशन थिएटर हैं।

निष्कर्ष

नया पाटन कैंसर अस्पताल उत्तर गुजरात के स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए बड़ा कदम है। लगभग ₹65 करोड़ में बना और जीवन ज्योत चैरिटेबल ट्रस्ट द्वारा संचालित यह अस्पताल पीईटी-सीटी स्कैन और लिनैक रेडियोथेरेपी को घर के पास लाता है। आयुष्मान कार्डधारकों के लिए मुफ्त पीईटी-सीटी से गरीब परिवारों का बोझ भी कम होगा।

ट्रस्ट अब ट्रांसप्लांट, रोबोटिक सर्जरी और कार्डियक सर्जरी की योजना बना रहा है। अगर ये योजनाएं सफल हुईं, तो पाटन उत्तर गुजरात का आधुनिक इलाज का मुख्य केंद्र बन सकता है। फिलहाल, हज़ारों कैंसर मरीज़ों को इलाज के लिए अहमदाबाद जाने की ज़रूरत नहीं रहेगी।

स्रोत: 1 नवंबर 2026 को हुए लोकार्पण पर आईएएनएस, जीएसटीवी, संदेश और गुजरात फर्स्ट की रिपोर्ट।

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