गुजरात सूखा 2026: 4 जिले सूखाग्रस्त घोषित, जानें राहत पैकेज
The Gujarat government has declared Kutch, Jamnagar, Porbandar and Devbhumi Dwarka districts drought-hit after weak monsoon rain. Farmers will get Rs 8,500 per hectare for crop loss, up to two hectares. Rural families in affected talukas will get 150 days of work, and cattle camps will get Rs 80 per animal per day. The measures take effect from November 1, 2026.

कमज़ोर और देर से आए मानसून के बाद गुजरात सरकार ने चार जिलों को सूखाग्रस्त घोषित कर दिया है। गुजरात सूखा घोषणा में कच्छ, जामनगर, पोरबंदर और देवभूमि द्वारका जिले शामिल हैं। मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने सोमवार, 26 अक्टूबर 2026 को गांधीनगर में यह फैसला सुनाया।
राज्य सरकार ने साथ ही राहत पैकेज की भी घोषणा की है। फसल नुकसान पर किसानों को ₹8,500 प्रति हेक्टेयर मिलेंगे, अधिकतम दो हेक्टेयर तक। इसके अलावा प्रभावित तालुकाओं में ग्रामीण परिवारों को 150 दिन का काम मिलेगा। पशु कैंपों को प्रति पशु रोज़ ₹80 की सहायता दी जाएगी। सभी फैसले 1 नवंबर 2026 से लागू होंगे।
गुजरात सूखा 2026: एक नज़र में
| बिंदु | विवरण |
|---|---|
| सूखाग्रस्त घोषित जिले | कच्छ, जामनगर, पोरबंदर, देवभूमि द्वारका |
| शामिल तालुका | 23 (रिपोर्ट के अनुसार) |
| घोषणा किसने की | मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल, कृषि मंत्री जीतू वाघाणी की मौजूदगी में |
| घोषणा की तारीख | 26 अक्टूबर 2026 |
| लागू होने की तारीख | 1 नवंबर 2026 |
| फसल नुकसान सहायता | ₹8,500 प्रति हेक्टेयर, अधिकतम 2 हेक्टेयर (SDRF मानदंड) |
| ग्रामीण रोजगार | VB-G RAM G के तहत 150 दिन |
| पशु कैंप सहायता | दो महीने तक प्रति पशु रोज़ ₹80 |
| रियायती चारा | ₹2 प्रति किलो |
| इस सीज़न राज्य में बारिश | मौसमी औसत का करीब 89% |
गुजरात के कौन से जिले सूखाग्रस्त हैं?
कच्छ और पश्चिमी सौराष्ट्र के चार जिले अब आधिकारिक रूप से सूखाग्रस्त हैं। ये चारों जिले गुजरात के सूखे पश्चिमी तट पर स्थित हैं। साथ ही, इस मानसून में चारों जिलों में बाकी राज्य से काफी कम बारिश हुई।
क्षेत्रीय मीडिया में आए राज्य के बारिश के आंकड़े कमी की गंभीरता दिखाते हैं:
| जिला | प्राप्त बारिश (औसत का %) | कमी |
|---|---|---|
| देवभूमि द्वारका | 16.54% | करीब 84% |
| पोरबंदर | 30.86% | करीब 70% |
| जामनगर | 43.26% | करीब 57% |
| कच्छ | 57.60% | करीब 43% |
देवभूमि द्वारका सबसे ज़्यादा प्रभावित है। यहां सामान्य मानसूनी बारिश का केवल छठा हिस्सा ही हुआ। नतीजतन, जिले के बड़े हिस्से में खरीफ की खड़ी फसलें खराब हो गईं।
गुजरात में 89% बारिश हुई, फिर सिर्फ चार जिले क्यों?
पूरे गुजरात में मौसमी औसत की करीब 89% बारिश हुई। 21 अक्टूबर तक राज्य में 908.88 मिमी औसत के मुकाबले 810.68 मिमी बारिश दर्ज हुई। कागज़ पर यह लगभग सामान्य है।
हालांकि, बारिश का बंटवारा असमान रहा। दक्षिण और मध्य गुजरात में लगातार बारिश हुई। वहीं, पश्चिमी पट्टी लंबे समय तक सूखी रही। मुख्यमंत्री ने कहा कि इन चार जिलों में इस सीज़न बहुत कम बारिश हुई।
कई अन्य जिलों में भी बारिश कम रही। राजकोट, जूनागढ़, गिर सोमनाथ, साबरकांठा, बनासकांठा, अरवल्ली, छोटा उदेपुर और दाहोद में औसत की करीब 60% से 67% बारिश हुई। हालांकि, अब तक इनमें से किसी को सूखाग्रस्त घोषित नहीं किया गया है। क्षेत्रीय मीडिया के अनुसार करीब 12 जिलों में बारिश की कमी दर्ज हुई।
राज्य का कहना है कि फैसले से पहले केंद्र के सूखा नियमों का पालन किया गया। इन नियमों में केवल बारिश नहीं, कई संकेतकों को देखा जाता है। इसलिए बारिश की कमी वाला हर जिला अपने आप पात्र नहीं हो जाता।
गुजरात सूखा राहत पैकेज: किसानों को क्या मिलेगा
सबसे बड़ी राहत फसल नुकसान सहायता है। चारों जिलों में जिन किसानों की फसल खराब हुई है, उन्हें ₹8,500 प्रति हेक्टेयर मिलेंगे। यह भुगतान राज्य आपदा प्रतिक्रिया कोष (SDRF) के मानदंडों के अनुसार होगा। प्रति किसान अधिकतम दो हेक्टेयर की सीमा है, यानी अधिकतम सहायता ₹17,000 होगी।
भुगतान फसल नुकसान सर्वे के बाद होगा। रिपोर्ट के अनुसार सर्वे पूरा होने पर पात्र किसानों को राशि दी जाएगी। इसलिए किसान अपने ज़मीन के कागज़ और बैंक विवरण तैयार रखें।
SDRF सहायता के राष्ट्रीय मानदंड गृह मंत्रालय के आपदा प्रबंधन प्रभाग द्वारा प्रकाशित किए जाते हैं। किसान राज्य की कृषि योजनाओं की जानकारी आई-खेडूत पोर्टल और गुजरात कृषि विभाग की वेबसाइट पर भी देख सकते हैं।
VB-G RAM G के तहत 150 दिन का काम
सूखाग्रस्त तालुकाओं के ग्रामीण परिवारों को 150 दिन का मज़दूरी वाला काम मिलेगा। यह VB-G RAM G यानी विकसित भारत – रोज़गार और आजीविका गारंटी मिशन (ग्रामीण) के तहत दिया जाएगा।
VB-G RAM G ने मनरेगा की जगह ली है और यह 1 जुलाई 2026 से लागू है। सामान्य रूप से इसमें साल में 125 दिन के काम की गारंटी है। सूखा घोषणा से प्रभावित तालुकाओं के परिवारों को 25 दिन अतिरिक्त मिलेंगे।
यह इसलिए अहम है क्योंकि सूखे में खेतिहर मज़दूरी की मांग तेज़ी से घटती है। भूमिहीन मज़दूर और छोटे किसान सबसे पहले आमदनी खोते हैं। गारंटीशुदा काम के अतिरिक्त दिन उन्हें पलायन के बजाय गांव में रहने में मदद करते हैं। योजना की जानकारी ग्रामीण विकास मंत्रालय की वेबसाइट पर उपलब्ध है।
पशुपालकों के लिए चारा और पशु कैंप
कच्छ और सौराष्ट्र के ग्रामीण जीवन में पशुपालन की केंद्रीय भूमिका है। इसलिए पैकेज में पशुपालकों पर खास ध्यान दिया गया है।
बारिश में देरी को देखते हुए सरकार ने जून-जुलाई से ही पूरे गुजरात में रियायती दर पर चारा बेचना शुरू कर दिया था। अब तक ₹2 प्रति किलो की दर से करीब 1.21 करोड़ किलो चारा वितरित हुआ है। फिलहाल राज्य के पास करीब 3 करोड़ किलो चारा है। इसके अलावा और चारा खरीदने की प्रक्रिया शुरू हो गई है।
सूखाग्रस्त तालुकाओं के पशु कैंपों को दो महीने तक SDRF से प्रति पशु रोज़ ₹80 मिलेंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि इसके बाद सहायता जारी रखने का खर्च राज्य सरकार उठाएगी। ज़िला कलेक्टरों को भी विशेष मामलों में चारा वितरण के लिए विशेष अधिकार दिए गए हैं।
पानी: बांध, पीने का पानी और रबी सिंचाई
जल भंडारण दूसरी बड़ी चिंता है। सरकार के अनुसार गुजरात के 206 बड़े बांधों में कुल क्षमता का करीब 66% पानी है। हालांकि, रिपोर्टों के अनुसार सौराष्ट्र और उत्तर गुजरात के कुछ जलाशयों में भंडारण 25% से नीचे आ गया है।
राज्य ने पीने के पानी को पहली प्राथमिकता दी है। 30 जून 2027 तक पीने का पानी आरक्षित रखा गया है। इसके बाद ही रबी सीज़न के लिए सिंचाई की योजना बनाई गई है।
खरीफ सीज़न में मांग के आधार पर 44 बांधों के कमांड एरिया में सिंचाई का पानी दिया गया। रबी के लिए सरकार 76 बांधों के कमांड एरिया में पानी देने की योजना बना रही है:
- उत्तर गुजरात: धरोई और दांतीवाड़ा सहित 11 बांध
- मध्य गुजरात: करजण और पानम सहित 12 बांध
- दक्षिण गुजरात: उकाई, काकरापार और दमणगंगा सहित 9 बांध
- सौराष्ट्र: शेत्रुंजी, ब्राह्मणी और मच्छु सहित 39 बांध
- कच्छ: 5 बांध
पानी की उपलब्धता के आधार पर किसानों को इन बांधों से एक से चार बार सिंचाई का पानी मिलेगा। बांधवार जानकारी नर्मदा, जल संसाधन, जल आपूर्ति और कल्पसर विभाग प्रकाशित करता है।
भारत में किसी जिले को सूखाग्रस्त कैसे घोषित किया जाता है?
भारत में सूखा राज्य सरकार घोषित करती है, केंद्र नहीं। यह प्रक्रिया कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय की सूखा प्रबंधन नियमावली, 2016 के अनुसार होती है।
नियमावली चरणबद्ध जांच करती है। सबसे पहले अधिकारी बारिश की कमी और सूखे अंतराल देखते हैं। फिर बुवाई, उपग्रह से मिले वनस्पति आंकड़े, मिट्टी की नमी, जलाशय स्तर और भूजल जैसे प्रभाव संकेतकों की जांच होती है। अंत में खेतों का सर्वे फसल नुकसान की पुष्टि करता है।
इसके बाद राज्य औपचारिक अधिसूचना जारी करता है। इसमें शामिल तालुका या गांव और सूखे का स्तर, मध्यम या गंभीर, लिखा होता है। सूखा अधिसूचना छह महीने तक मान्य रहती है। उसके बाद स्थिति की फिर समीक्षा करनी होती है।
गुजरात सरकार ने कहा कि घोषणा से पहले यह प्रक्रिया पूरी की गई और उच्च स्तरीय बैठकें हुईं। प्रेस कॉन्फ्रेंस में अतिरिक्त मुख्य सचिव (राजस्व) जयंती रवि भी मौजूद थीं। राज्य में आपदा राहत का काम राजस्व विभाग संभालता है। सूखा आकलन का प्रशिक्षण गुजरात आपदा प्रबंधन संस्थान देता है।
मुख्यमंत्री ने क्या कहा?
भूपेंद्र पटेल ने कहा कि सरकार को देर से बारिश के कारण आने वाली मुश्किलों का अंदाज़ा था। इसलिए औपचारिक घोषणा से काफी पहले तैयारी शुरू कर दी गई थी। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार पूरी संवेदनशीलता के साथ किसानों और पशुपालकों के साथ खड़ी है।
पटेल ने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में सरकार ने हमेशा किसानों को प्राथमिकता दी है। उन्होंने भविष्य के किसी भी संकट में आगे मदद का भरोसा दिया।
विपक्ष ने सहायता को नाकाफी बताया
कांग्रेस ने राहत की राशि की आलोचना की है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अमित चावड़ा ने कहा कि ₹8,500 प्रति हेक्टेयर का मतलब प्रति गुंठा सिर्फ करीब ₹85 है। उन्होंने बताया कि DAP खाद की एक बोरी ही करीब ₹2,000 की आती है। उनके अनुसार इतनी सहायता से किसानों का असली नुकसान पूरा नहीं होगा।
गुजरात प्रदेश किसान कांग्रेस के अध्यक्ष पाल आंबलिया ने भी इस राशि को किसानों के साथ क्रूर मज़ाक बताया। उन्होंने सरकार से पैकेज पर फिर से विचार करने की मांग की। साथ ही, फैसला न बदलने पर आंदोलन की चेतावनी दी।
घोषणा के दायरे पर भी सवाल उठे हैं। आलोचकों का कहना है कि बारिश की कमी वाले करीब 12 जिलों में से सिर्फ चार को शामिल किया गया।
2018 के सूखे से तुलना
गुजरात ने पिछली बार दिसंबर 2018 में बड़ा सूखा घोषित किया था। तब 16 जिलों के 51 तालुकाओं के गांवों को अछतग्रस्त या सूखाग्रस्त घोषित किया गया था। रिपोर्टों के अनुसार तब फसल सहायता ₹6,800 प्रति हेक्टेयर थी।
इस साल की घोषणा क्षेत्रफल में छोटी है। हालांकि, प्रति हेक्टेयर फसल सहायता ₹8,500 के साथ ज़्यादा है। राज्य सूखे से अनजान भी नहीं है। कच्छ और सौराष्ट्र ने 1985–87 में और उससे पहले कई बार भीषण सूखा झेला है।
इस साल गुजरात अकेला नहीं है। क्षेत्रीय मीडिया के अनुसार महाराष्ट्र, कर्नाटक, राजस्थान, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना के कुछ हिस्सों में भी सूखा घोषित हुआ है। कई विशेषज्ञ कमज़ोर मानसून को अल नीनो से जोड़ते हैं। मौसमी बारिश के आंकड़े भारत मौसम विज्ञान विभाग पर उपलब्ध हैं।
कच्छ और सौराष्ट्र के लिए सूखे का मतलब
कच्छ और पश्चिमी सौराष्ट्र बारिश पर आधारित खेती पर बहुत निर्भर हैं। यहां मूंगफली, कपास, बाजरा और अरंडी मुख्य खरीफ फसलें हैं। मानसून विफल होने पर ये फसलें भी विफल हो जाती हैं।
इस क्षेत्र में गुजरात की सबसे बड़ी पशु आबादी में से एक है। कच्छ अपने पशुपालक समुदायों और बन्नी घास के मैदानों के लिए जाना जाता है। इसलिए सूखा साल दूध की आमदनी पर भी उतना ही असर डालता है जितना फसल पर।
देवभूमि द्वारका और पोरबंदर जैसे तटीय जिलों के सामने एक और खतरा है। कम बारिश से भूजल रिचार्ज घटता है। समय के साथ खारा पानी अंदर तक घुसकर कुओं को खराब कर सकता है।
इसके अलावा, खराब खरीफ सीज़न रबी पर भी असर डालता है। जिन किसानों के पास पक्की सिंचाई नहीं है, वे इस सर्दी में ज़मीन खाली छोड़ सकते हैं। इसीलिए सिंचाई योजना का समय नकद सहायता जितना ही अहम है।
चार जिलों के किसान राहत कैसे पाएं?
सटीक प्रक्रिया आधिकारिक अधिसूचना में बताई जाएगी। पिछले अनुभव के आधार पर किसान अभी ये कदम उठा सकते हैं:
- 7/12 और 8-अ सहित ज़मीन के रिकॉर्ड तैयार रखें।
- सीधे भुगतान के लिए बैंक खाता आधार से जुड़ा हो, यह सुनिश्चित करें।
- फसल नुकसान सर्वे के दौरान राजस्व और कृषि कर्मचारियों का सहयोग करें।
- ग्राम पंचायत, तलाटी या तालुका कार्यालय की सूचनाओं पर नज़र रखें।
- VB-G RAM G के तहत काम के लिए, जॉब कार्ड न हो तो ग्राम पंचायत में पंजीकरण कराएं।
- पशुपालक चारे और कैंप सहायता के लिए नज़दीकी पशु कैंप या कलेक्टर कार्यालय से संपर्क करें।
किसान केवल आधिकारिक माध्यमों पर भरोसा करें। राहत राशि के लिए किसी बिचौलिए को पैसे न दें।
आगे क्या होगा?
सरकार आने वाले दिनों में औपचारिक अधिसूचना जारी कर सकती है। इसके बाद राहत कार्य शुरू होंगे। इस बीच 23 प्रभावित तालुकाओं में फसल नुकसान सर्वे जारी रहेगा।
चारों जिलों के किसान और पशुपालक जानकारी के लिए अपने तालुका कार्यालय या कलेक्टर कार्यालय से संपर्क करें। आधिकारिक अपडेट गुजरात सरकार के पोर्टल पर भी आएंगे।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
2026 में गुजरात के कौन से जिले सूखाग्रस्त घोषित हुए हैं?
कच्छ, जामनगर, पोरबंदर और देवभूमि द्वारका। गुजरात सरकार ने 26 अक्टूबर 2026 को इसकी घोषणा की।
गुजरात सूखे में किसानों को कितनी फसल नुकसान सहायता मिलेगी?
SDRF मानदंड के तहत ₹8,500 प्रति हेक्टेयर, अधिकतम दो हेक्टेयर तक। यानी प्रति किसान अधिकतम ₹17,000।
गुजरात सूखा राहत उपाय कब से लागू होंगे?
राहत उपाय 1 नवंबर 2026 से लागू होंगे। फसल सहायता नुकसान सर्वे पूरा होने के बाद दी जाएगी।
ग्रामीण परिवारों को कितने दिन का काम मिलेगा?
सूखाग्रस्त तालुकाओं के परिवारों को VB-G RAM G के तहत 150 दिन का काम मिलेगा। यह सामान्य 125 दिन की गारंटी से 25 दिन ज़्यादा है।
पशुपालकों को क्या मदद मिलेगी?
पशु कैंपों को SDRF से दो महीने तक प्रति पशु रोज़ ₹80 मिलेंगे। इसके बाद राज्य सरकार भुगतान करेगी। चारा भी ₹2 प्रति किलो पर उपलब्ध है।
गुजरात में 89% बारिश के बावजूद सूखा क्यों घोषित हुआ?
89% राज्य का औसत आंकड़ा है। इन चार जिलों में सामान्य की केवल करीब 17% से 58% बारिश हुई।
भारत में सूखा किन नियमों से घोषित होता है?
राज्य केंद्र की सूखा प्रबंधन नियमावली, 2016 का पालन करते हैं। इसमें बारिश, फसल, वनस्पति, मिट्टी की नमी और पानी के संकेतक देखे जाते हैं, फिर खेतों का सर्वे होता है।
एजेंसियों के इनपुट के साथ।



